जांच रिपोर्ट के बाद डॉक्टरों की हड़ताल दुर्भाग्यपूर्ण:-सुदीप कुमार सुमन

📅 September 24, 2026 🕒 1:39 pm
Reporter
Report By Ashish Jha

सहरसा:-डॉक्टर और पत्रकार प्रकरण में जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग के स्तर से कार्रवाई किए जाने के बावजूद सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों द्वारा हड़ताल और उसके समर्थन में आईएमए के खड़े होने पर युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुदीप कुमार सुमन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हड़ताल लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन किसी भी आंदोलन के कारण गरीब, लाचार और जरूरतमंद मरीजों की चिकित्सा सेवा बाधित होना गंभीर चिंता का विषय है। मानव जीवन से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर किसी संगठनात्मक मांग को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सुमन ने कहा कि 12 सितंबर को सदर अस्पताल सहरसा में पत्रकार और चिकित्सक एवं अस्पताल कर्मियों के बीच हुई घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रथम दृष्टया घटनाक्रम को पूरा बिहार और देश देख चुका है। यदि उसी समय भाषा और आईएमए अपने चिकित्सक सहकर्मी के समर्थन में सामने आते तो यह संगठनात्मक एकजुटता मानी जा सकती थी। लेकिन जिला प्रशासन की जांच प्रक्रिया पूरी होने और उसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद हड़ताल जारी करना कई सवाल खड़े करता है।                उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी और इसके बाद विभाग ने सदर अस्पताल के दो चिकित्सकों को उनके वर्तमान पद से हटाकर स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय, पटना में योगदान देने का आदेश दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट के बाद की गई है। सुदीप कुमार सुमन ने कहा कि मुख्यालय में योगदान देने का आदेश किसी अंतिम दंड का निर्णय नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है। ऐसे में जांच की प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई को पूरा होने देने के बजाय हड़ताल के माध्यम से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करना आम जनता के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट में जिन दो चिकित्सकों और एक अस्पताल कर्मी के आचरण को लेकर विभाग के समक्ष तथ्य रखे गए हैं, उनके संबंध में पूर्व में भी शिकायतें और सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टरों के संगठनों को केवल अपने सहकर्मियों के पक्ष में खड़े होने के बजाय पूरे प्रकरण और मरीजों के हित को भी गंभीरता से देखना चाहिए। सुमन ने जिला पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से भी मांग की कि सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी परिस्थिति में बाधित न हों तथा मरीजों के हित में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इस खबर को शेयर करें
WhatsApp Facebook X
Advertisement
Sponsor Ad
Sponsor Ad
Sponsor Ad
Sponsor Ad
Sponsor Ad
Sponsor Ad
Sponsor Ad
Sponsor Ad