महिला किसान दिवस का आयोजन, महिला सशक्तिकरण पर दिया गया जोर: मेरी कहानी, मेरी खेती

📅 October 16, 2026 🕒 9:55 am
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Report By Ashish Jha

पटना:-भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में गुरुवार को “मेरी कहानी, मेरी खेती: नवाचार, सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता” थीम के अंतर्गत महिला किसान दिवस मनाया गया। विदित हो की संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 घोषित किया है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला किसानों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ-साथ सतत आजीविका, कृषि उद्यमिता, आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा पारिवारिक पोषण को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर पटना जिला परिषद की अध्यक्ष श्रीमती स्तुति गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने महिला किसानों से अपनी अंतर्निहित क्षमताओं और सामर्थ्य को पहचानने का आह्वान करते हुए राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक विकास में महिलाओं के समान योगदान पर बल दिया। अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने महिलाओं को आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अन्य महिलाओं को भी जागरूक एवं प्रेरित करने का आह्वान किया, ताकि अधिकाधिक महिलाएँ अपनी क्षमताओं को पहचानकर आत्मनिर्भर बन सकें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सफलता प्राप्त करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, दृढ़ संकल्प और निरंतर सीखने के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिला किसानों को क्षमता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से अपने कौशल को सुदृढ़ करने तथा आर्थिक सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता के लिए कृषि उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।            उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और महिला-आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने में वैज्ञानिक तकनीकों, नवोन्मेषी कृषि पद्धतियों तथा स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। इस अवसर पर बिहार एवं झारखंड की नवाचारी महिला किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इन महिला किसानों की वार्षिक आय ₹2 लाख से ₹4.8 लाख तक है। उन्होंने अपनी प्रेरणादायक सफलता की कहानियाँ एवं अनुभव साझा किए, जिससे अन्य महिलाओं को नवाचारी तथा आयवर्धक कृषि पद्धतियाँ अपनाने की प्रेरणा मिली। कृषि अनुसंधान एवं संस्थान के विकास में योगदान देने वाली महिला वैज्ञानिकों, प्रशासनिक कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों के कार्यों की भी सराहना की गई। इसके अतिरिक्त, कृषि पत्रकारिता एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक महिला पत्रकार तथा एक पीएच.डी. शोधार्थी को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण महिला किसानों के बीच उन्नत सब्जियों के बीजों एवं फलदार पौधों का वितरण रहा। इसका उद्देश्य घरेलू पोषण को बढ़ावा देना था। घर के आसपास पौष्टिक सब्जियाँ उगाने के लिए पालक, धनिया, मेथी, गाजर और मूली के बीज वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य आहार में विविधता बढ़ाना, परिवार की पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा बाजार से सब्जियाँ खरीदने पर निर्भरता कम करना था। इसके माध्यम से कृषि उत्पादन को पारिवारिक स्वास्थ्य एवं पोषण से जोड़ने में महिला किसानों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया गया। संस्थान के विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों ने कृषि में महिलाओं की भागीदारी, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा सतत कृषि पद्धतियों एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के संबंध में अपने विचार साझा किए। वैज्ञानिकों और महिला किसानों के बीच आयोजित संवादात्मक विचार-मंथन सत्र में महिला किसानों को अपने अनुभवों, चुनौतियों एवं व्यावहारिक समस्याओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखने का अवसर मिला। चर्चा के दौरान कृषि उत्पादकता एवं आजीविका में सुधार के लिए उपयुक्त तकनीकी हस्तक्षेपों तथा उपलब्ध अवसरों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम में शामिल महिला किसानों ने संस्थान के प्रक्षेत्र का भी भ्रमण किया और उन्नत कृषि तकनीकों एवं पद्धतियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इनमें पोषण वाटिका, सूक्ष्म सिंचाई, मोटे अनाज की खेती, प्राकृतिक खेती, समेकित कृषि प्रणाली तथा पशुपालन की वैज्ञानिक पद्धतियाँ शामिल थीं। प्रक्षेत्र प्रदर्शनों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों ने संसाधनों के कुशल उपयोग पर आधारित सतत एवं विविधीकृत कृषि पद्धतियों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की। इन पद्धतियों को अपनाकर कृषि उत्पादकता, पारिवारिक पोषण तथा आय में वृद्धि की जा सकती है। इसी क्रम में, संस्थान के अनुसंधान केंद्र एफएसआरसीएचपीआर, राँची में भी महिला किसान दिवस मनाया गया। वहाँ घरेलू पोषण में सुधार तथा महिला किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए बागवानी आधारित कृषि पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया। संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), बक्सर एवं रामगढ़ में भी यह दिवस मनाया गया, जहाँ कृषि आय बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के महत्त्व को रेखांकित किया गया। संस्थान के सभी केंद्रों पर आयोजित कार्यक्रमों में कुल 392 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 284 महिलाएँ शामिल थीं। इन आयोजनों ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसका उद्देश्य कृषि आय में वृद्धि, पारिवारिक पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।

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