डॉक्टरों के अड़ियल रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पीड़ित आम जनता ने बड़े आंदोलन की दी है चेतावनी
सहरसा:- सदर अस्पताल में पत्रकार-डॉक्टर विवाद के बाद चिकित्सकों द्वारा शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। डॉक्टरों की इस हठधर्मिता और एकतरफा कार्य बहिष्कार के कारण अब आम जनता का धैर्य टूट चुका है और नागरिक संगठनों ने इसके खिलाफ एक बड़े जन-आंदोलन का आह्वान कर दिया है। उक्त बातें एआईएसएफ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य शंकर कुमार ने कहा। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल समेत जिले के तमाम सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार कई दिनों से ओपीडी सेवाएं और इमरजेंसी सेवा पूरी तरह ठप हैं।
ग्रामीण इलाकों से पैसे और समय खर्च कर इलाज कराने आ रहे गरीब मरीज बिना इलाज के ही वापस लौटने को मजबूर हैं। मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों और प्रशासन की इस लड़ाई से उनका कोई लेना-देना नहीं है। नियमित चिकित्सा न मिलने से कई गंभीर मरीजों की जान आफत में आ फंसी है। सहरसा में डॉक्टरों की मनमानी के खिलाफ आंदोलन की सुगबुगाहट जिला मुख्यालय में पत्रकार की पिटाई मामले को लेकर डॉक्टरों और जिला प्रशासन के बीच गतिरोध गहरा गया है। उन्होंने डॉक्टरों के अड़ियल रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पीड़ित आम जनता ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और व्यवसायी संगठनों ने एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। डॉक्टरों की इस तानाशाही और संवेदनहीनता से सहरसा की जनता तंग आ चुकी है। अगर डॉक्टर तुरंत काम पर नहीं लौटे, तो सहरसा की आम अवाम सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी।



