निखिल सिंह यादव ने कुलपति को ईमेल भेजकर शुल्क पर पुनर्विचार की किया मांग
सहरसा:- बीएनएमयू में पीजी फर्स्ट सेमेस्टर सत्र 2026-28 में ऑनलाइन आवेदन शुल्क अचानक ₹150 से बढ़ाकर ₹300 किए जाने पर छात्र जदयू ने आपत्ति जताई है। छात्र जदयू बीएनएमयू अध्यक्ष निखिल सिंह यादव ने शुल्क वृद्धि को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीएस झा को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर छात्र हित में शुल्क पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कुलपति को भेजे पत्र में निखिल सिंह यादव ने कहा कि बिहार लोकभवन, राजभवन सचिवालय, पटना के निर्देश पर विश्वविद्यालय ने छात्रहित में सत्र 2026-30 से यूजी फर्स्ट सेमेस्टर में नामांकन के लिए समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था शुरू की। इसमें सभी कोटि के छात्र-छात्राओं के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क ₹150 निर्धारित किया गया था और यूजी में नामांकन प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि इसी बीच 5 अक्टूबर 2026 को डीएसडब्लू प्रो. उमाशंकर चौधरी एवं एडमिशन नोडल डॉ. ओंकारनाथ मिश्रा के संयुक्त हस्ताक्षर से पीजी सत्र 2026-28 में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन संबंधी सूचना जारी की गई।
इसमें आवेदन की तिथि 5 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है, जबकि ऑनलाइन आवेदन शुल्क ₹300 रखा गया है। निखिल सिंह यादव ने कहा कि यूजी की तरह पीजी में भी ऑनलाइन आवेदन शुल्क ₹150 ही रखा जाना चाहिए। शुल्क को अचानक दोगुना किए जाने से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और इसे लेकर छात्र-छात्राओं एवं विभिन्न छात्र संगठनों में नाराजगी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पीजी ऑनलाइन आवेदन की तिथि 5 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक निर्धारित कर दी गई, लेकिन अब तक ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जब पोर्टल खोलने की तैयारी पूरी नहीं थी, तो आवेदन की तिथि पहले से जारी करने का औचित्य क्या है। उनका कहना है कि आवेदन शुरू करने से पहले सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक तैयारियां पूरी की जानी चाहिए थीं। छात्र जदयू अध्यक्ष ने कुलपति से मांग की कि पीजी फर्स्ट सेमेस्टर में ऑनलाइन आवेदन शुल्क को यूजी की तरह ₹150 निर्धारित किया जाए तथा पोर्टल शुरू होने के अनुरूप संशोधित आवेदन तिथि जारी की जाए। निखिल सिंह यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऑनलाइन आवेदन शुल्क में की गई वृद्धि पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो छात्र जदयू लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होगा।



