फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तीसरे दिन दिल्ली विश्वविद्यालय और बीएचयू के प्रोफेसरों ने दिया व्याख्यान

📅 October 8, 2026 🕒 1:48 pm
अंतिम अपडेट: 16 Oct 2026, 06:46 AM
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Report By Ashish Jha

11 अक्टूबर तक लगातार चलेगा व्याख्यान

मधेपुरा/सहरसा:-स्थानीय ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय स्थित स्मार्ट क्लास रूम में मंगलवार से शुरू हुए छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तीसरे दिन गुरुवार को दो विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज, रसायन विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश भारती रहे। उन्होंने लिटरेचर रिव्यू टेक्नीक्स एंड सिस्टेमेटिक रिव्यूज विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि साहित्य समीक्षा पांच प्रकार की होती है। जिनमें व्यवस्थित, वर्णनात्मक, नैरेटिव, आलोचनात्मक एवं स्कोपिंग समीक्षा।    शोध की गुणवत्ता लिटरेचर रिव्यू की मजबूती पर निर्भर करती है। साहित्य समीक्षा की गुणवत्ता कैसे चेक की जाए, गुणात्मक, मात्रात्मक एवं मिश्रित विधिया, प्रिज्म गाइडलाइन, रिसर्च गैप की पहचान तथा मेटा-विश्लेषण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की और शोधार्थियों को बताया कि कैसे अच्छे जर्नल्स का चयन करें। वही द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता इंस्टिट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, आरजीएससी मिर्जापुर (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुलदीप बौद्ध रहे। उन्होंने थीसिस एंड डिजर्टेशन राइटिंग एंड एकेडमिक राइटिंग एंड कम्युनिकेशन विषय पर व्याख्यान दिया।            डॉ. बौद्ध ने कहा कि थीसिस लेखन अध्यायों का संग्रह नहीं बल्कि एक तर्क है। अच्छी थीसिस में पांच चीजें होनी चाहिए। जिनमें प्रॉब्लम, गैप, क्वेश्चन, एविडेंस और कंट्रीब्यूशन है। उन्होंने टिपिकल थीसिस आर्किटेक्चर, आईएमआरएडी स्ट्रक्चर, प्रीलिमिनरी पेजेस, रेफरेंस मैनेजमेंट, प्लेजरिज्म से बचाव और प्रभावी एकेडमिक कम्युनिकेशन के टिप्स के बारे में भी बताया। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. डॉ. कैलाश प्रसाद यादव ने बताया कि दोनों रिसोर्स पर्सन द्वारा काफी लाभदायक और तकनीकी ज्ञान दिया गया। वही महाविद्यालय अर्थपाल डॉ. रत्नदीप ने कहा कि शिक्षकों की कई नई जानकारी मिल रही है। जिससे छात्रों को लाभ मिलेगा। ऐसे कार्यक्रम से शिक्षकों की शोध क्षमता में वृद्धि होती है। जिससे शोध के छात्रों को नया आयाम मिलेगा। मौके पर महाविद्यालय प्रोफेसर डॉ. वीणा कुमारी, डॉ. मनोज कुमार यादव, सीनेटर डॉ. दीपक कुमार राणा, डॉ. उपेंद्र प्रसाद यादव, डॉ. मधुनंदा, डॉ. स्वर्णमणि, डॉ. विनय कुमार, डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, डॉ. गुड्डू कुमार, डॉ. कुमार सौरभ, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. संजीव कुमार सुमन, डॉ. प्रियंका भारती, डॉ. चंद्रदीप नंदलाल यादव, डॉ. विजय कृष्ण, डॉ. भारती कुमारी, डॉ. मिंटू कुमार मेनन, डॉ. यासमीन रशीदी, डॉ. मनोज कुमार ठाकुर, डॉ. शहरयार अहमद, डॉ. हरित कृष्णा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. संतोष कुमार सेठी, डॉ. अंकेश कुमार, डॉ. बैजबंस कुमार, डॉ. सुमित कुमार, डॉ. मुकुंद कुमार, डॉ. सीमा कुमारी, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. विदुषी भारती, डॉ. प्रीति, डॉ. मीनू सोढ़ी, अनामिका सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन एफडीपी कोऑर्डिनेटर डॉ. मिथिलेश कुमार एवं असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. कुमार गौरव ने किया। तकनीकी मदद डॉ मनीष द्वारा दिया गया। प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चंद्रदीप नंदलाल यादव ने किया। जबकि द्वितीय सत्र का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुकुंद ने किया।

 

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