बीमार समझकर चांदनी झा ने की सेवा, अब हर दिन घर के हर कमरे के दरवाजे तक पहुंचता है पालतू कौवा
सहरसा:- इंसान और पशु-पक्षियों के बीच प्रेम और अपनापन की कई ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो दिल को छू जाती हैं। ऐसी ही एक अनोखी कहानी कवयित्री चांदनी झा के घर की है, जहां एक कौवा पिछले कुछ दिनों से रोजाना पहुंच रहा है। शुरुआत में चांदनी ने उसे बीमार समझकर उसकी मदद करने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच ऐसा अपनापन बना कि अब वह कौवा प्रतिदिन उनके घर आने लगा है। चांदनी झा के अनुसार, कुछ दिन पहले सुबह उनकी नजर आंगन में आए एक कौवे पर पड़ी। वह अन्य कौवों की तुलना में कमजोर नजर आ रहा था और ठीक से उड़ नहीं पा रहा था। वह कभी छत पर, कभी दूसरी छत पर तो कभी जमीन पर आकर बैठ जाता था। उसे दाना चुनने में भी परेशानी हो रही थी। यह देखकर चांदनी को उस पर दया आ गई और उन्होंने उसे पकड़कर देखने की कोशिश शुरू कर दी। कौवा उनके पास तो आता, लेकिन पकड़ने की कोशिश करते ही उड़ जाता। अगले दिन भी वह कौवा आंगन में पहुंचा। चांदनी ने उसके लिए दाने बिखेरे, लेकिन वह छोटे दाने ठीक से नहीं चुन पा रहा था। तब उन्होंने रोटी के कुछ टुकड़े उसकी ओर फेंके। कौवे ने बड़े टुकड़े आसानी से उठाकर खाना शुरू कर दिया। इससे चांदनी को लगा कि कम से कम उसके पेट में भोजन तो पहुंच रहा है। इसके बाद उन्होंने उसे पकड़कर देखने का निश्चय किया। करीब 30-35 मिनट तक प्रयास करने के बाद आखिरकार वह कौवा उनके हाथ में आ गया। कौवे ने चोंच मारने की कोशिश की, लेकिन चांदनी ने उसे संभालकर सहलाया और उसकी स्थिति देखने लगीं। उन्हें उसका शरीर कुछ गर्म लगा। साथ ही उसका एक पैर भी थोड़ा चोटिल प्रतीत हो रहा था। उन्होंने उसे बिस्कुट के टुकड़े खिलाए और दाना-पानी दिया। साथी कौवों ने घेर लिया आंगन:-कौवे को चांदनी के हाथ में देखकर उसके कई साथी कौवे आंगन के आसपास जमा हो गए। करीब 15-20 कौवों के एकत्र होने से ऐसा लग रहा था, जैसे वे अपने साथी की सुरक्षा के लिए वहां पहुंच गए हों। इससे चांदनी को पक्षियों के बीच आपसी प्रेम और अपनापन महसूस हुआ। चांदनी बताती हैं कि जब वह कौवे को पकड़ने की कोशिश करती थीं, तब उसका एक साथी लगातार काँव-काँव करके उसे सचेत करता था। उनके अनुसार, इस घटना ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि पक्षियों में भी अपने साथियों के प्रति कितना लगाव और चिंता होती है।
सेवा के बाद बना घर का पालतू कौवा:-कौवे को सहलाने और उसे खाना-पानी देने के बाद चांदनी ने उसे उड़ा दिया। इसके बाद वह अगले दिन फिर उनके घर पहुंच गया। पहले वह सिर्फ सुबह के समय आंगन में आता था, लेकिन अब धीरे-धीरे घर के अलग-अलग कमरों के दरवाजे तक पहुंचने लगा है। एक दिन जब वह रसोई के मुख्य दरवाजे तक पहुंचा तो चांदनी की मां उसे भगाने लगीं। इस पर उनके पिता ने कहा, रहने दीजिए, इसे मत भगाइए। यह चांदनी का पालतू कौवा है। इसके बाद परिवार ने आंगन में उसके लिए खाना और पानी रख दिया। कौवे ने भरपेट भोजन किया, पानी पिया और फिर उड़ गया। अब यह कौवा प्रतिदिन चांदनी के घर आता है। वह आंगन के साथ-साथ उन कमरों के दरवाजों तक भी जाता है, जहां वह पहले चांदनी के साथ गई थी। उसे शायद यह समझ आ गया है कि इस घर में उसे भोजन और पानी आसानी से मिल जाएगा। चांदनी झा का कहना है कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें यह एहसास कराया कि पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं में भी प्रेम, लगाव और अपनापन होता है। उनका मानना है कि इंसानों को भी पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील और प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। एक छोटे से कौवे के साथ बने इस रिश्ते ने उनके घर में भी एक अलग तरह की खुशी ला दी है।



