Report By
Ashish Jha
सहरसा:- भादप्रद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर शुक्रवार को जिले भर में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की गई। भविष्य पुराण में अनंत पूजा की विधान के अनुरूप शहर के शंकर चौक मंदिर, महावीर चौक मंदिर, मसोमात पोखर मंदिर, प्रशांत मोड़ दुर्गा मंदिर, पंचवटी चौक मंदिर, कचहरी चौक मंदिर सहित शहर के अन्य स्थलों पर अनंत पूजा का आयोजन किया गया। अनंत पूजा बाद श्रद्धालु अनंत धारण कर प्रसाद ग्रहण किए। सुख-शांति हेतु प्रार्थना के लिए अनंत चतुदर्शी पर पूजा-अर्चना के लिए देवालयों में लोगों की भीड़ उमड़ी रही। अनंत चतुर्दशी को लेकर सुबह से ही घरों में भक्तिमय माहौल में प्रसाद के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए गए।
अनंत चतुर्दशी को लेकर बाजार में 14 गांठ वाले विभिन्न प्रकार के रक्षासूत्र के अलावा फलों की बिक्री जोड़ शोर से हुई। शहर के विभिन्न हिस्सों में रक्षासूत्र की खरीदारी के लोग बाजार पहुंचते रहे। सुबह स्नान कर नया वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल पर कलश स्थापित किया गया। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की तस्वीर के समक्ष अनंत व्रत की कथा की समाप्ति पर 14 गांठ वाले रक्षासूत्र को पुरुष दाएं हाथ तथा महिलाएं बाएं हाथ के बाजू पर बांधे। मान्यता है कि लगातार 14 वर्षों तक अनंत चतुर्दशी व्रत रखने पर विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी व्रत का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। मान्यता है कि नाना प्रकार के बाधाओं को दूर कर सुख-शांति प्रदान करने वाले अनंत चतुर्दशी व्रत पांडवों ने उस समय किया था जब ने वन-वन भटक रहे थे। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। यह भगवान विष्णु की अनंत रूप में उपासना का दिन है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान के अनंत स्वरूप के लिए व्रत रखा जाता है। इस दिन अनंत सूत्र बांधा जाता है। व्रत की महिमा अपरंपार:- शास्त्रों में इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विधान है। अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का बड़ा महत्व है। यह अनंत सूत्र सूत के धागे को हल्दी में भिगोकर 14 गांठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में धारण किया जाता है। हर गांठ में श्री नारायण के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है। पहले में अनंत, उसके बाद ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद की पूजा होती है। मान्यता है कि इस अनंत सूत्र को बांधने से व्यक्ति प्रत्येक कष्ट से दूर रहता है। जो मनुष्य विधिपूर्वक इस दिन श्री हरि की पूजा करता है उसे सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अनंत चतुुर्दशी के दिन धूमधाम से गणपति विसर्जन किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी को लेकर बाजार में 14 गांठ वाले विभिन्न प्रकार के रक्षासूत्र के अलावा फलों की बिक्री जोड़ शोर से हुई। शहर के विभिन्न हिस्सों में रक्षासूत्र की खरीदारी के लोग बाजार पहुंचते रहे। सुबह स्नान कर नया वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल पर कलश स्थापित किया गया। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की तस्वीर के समक्ष अनंत व्रत की कथा की समाप्ति पर 14 गांठ वाले रक्षासूत्र को पुरुष दाएं हाथ तथा महिलाएं बाएं हाथ के बाजू पर बांधे। मान्यता है कि लगातार 14 वर्षों तक अनंत चतुर्दशी व्रत रखने पर विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। अनंत चतुर्दशी व्रत का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। मान्यता है कि नाना प्रकार के बाधाओं को दूर कर सुख-शांति प्रदान करने वाले अनंत चतुर्दशी व्रत पांडवों ने उस समय किया था जब ने वन-वन भटक रहे थे। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। यह भगवान विष्णु की अनंत रूप में उपासना का दिन है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान के अनंत स्वरूप के लिए व्रत रखा जाता है। इस दिन अनंत सूत्र बांधा जाता है। व्रत की महिमा अपरंपार:- शास्त्रों में इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विधान है। अनंत चतुर्दशी की पूजा में सूत्र का बड़ा महत्व है। यह अनंत सूत्र सूत के धागे को हल्दी में भिगोकर 14 गांठ लगाकर तैयार किया जाता है। इसे हाथ या गले में धारण किया जाता है। हर गांठ में श्री नारायण के विभिन्न नामों से पूजा की जाती है। पहले में अनंत, उसके बाद ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद की पूजा होती है। मान्यता है कि इस अनंत सूत्र को बांधने से व्यक्ति प्रत्येक कष्ट से दूर रहता है। जो मनुष्य विधिपूर्वक इस दिन श्री हरि की पूजा करता है उसे सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अनंत चतुुर्दशी के दिन धूमधाम से गणपति विसर्जन किया जाता है।



